Sundar Kavitayien..
Monday, July 16, 2007
तेरी याद
छ्लकता है नूर तेरा मेरी आखों से,
तड़प रहा हूँ मैं और अब ये आलम है,
और इंतेज़ार नही होता अब मेरी सासों से,
तुझे चाहने वाले कम न होंगे,
वक़्त के साथ शायद हम न होंगे,
चाहे िकसी को िकतना भी प्यार देना,
लेकिन तेरी यादों के हक़दार िसर्फ़ हम ही होंगे
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