एक दिन यूँ ही आधी रात को
मेरी हथेली पर लिखा था तुमने
कि गया हुआ वक़्त कभी लौट के नहीं आता
तब से तेरे साथ बीते उन्हीं पलों
को अपने तस्सवुर में जी लेती हूँ मैं
कानो में धीरे से कही थी एक बात
कि यह जो अंधेरा है ज़िंदगी में
यह सिर्फ़ कुछ पल का ही तो है
तब से उन्हीं उजालों की इंतज़ार में
एक-एक पल को गिनती रहती हूँ मैं
थाम के अपने हाथों में हाथ मेरा
मुस्करा के एक बोल कहा था
कि वादा है ता-उम्र साथ निभाने का तुमसे
तब से उन्हीं वादों को अपने आँचल में बाँधे
संवरती सजती ख़ुद में सिमटती रहती हूँ मैं
नज़रों में मेरी झाँक के कहा था
की एक प्यार का संसार है जहाँ तुम हो ,मैं हूँ
किरणों की रोशनी थामे जहाँ चाँद उतर आता है
तब से यूँ ही अपने ख़्यालो में रात की रानी-सी
ख़ुद ब ख़ुद महकती सी रहती हूँ मैं
और यह भी कहा था तुमने की
कुछ सवालो के जवाब ख़ुद वक़्त देता है
तब से अपने हर जवाब को
तेरी कही बातों में तलाशती रहती हूँ मैं ...
No comments:
Post a Comment